मुनव्वर राना की बेटी होने की सज़ा दी जा रही है: सुमैया राना
लखनऊ में नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहीं क़रीब 150 अज्ञात और 30 महिलाओं के ख़िलाफ़ पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज की है. जिन महिलाओं के ख़िलाफ़ नामज़द रिपोर्ट दर्ज की गई है उनमें मशहूर शायर मुनव्वर राना की दो बेटियां भी शामिल हैं.
मुनव्वर राना की बड़ी बेटी सुमैया राना पहले दिन से ही प्रदर्शन में शामिल हैं और उस रात भी वहीं थीं, जब पुलिस वालों ने प्रदर्शनकारियों में बांटे जा रहे कंबल और खाने-पीने की चीज़ें ज़ब्त कर ली थीं. बीबीसी से बातचीत में सुमैया कहती हैं कि उन्हें और उनकी बहन को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वो मुनव्वर राना की बेटी हैं.
सुमैया कहती हैं, "हमें तो एफ़आईआर की कोई सूचना नहीं मिली है और न ही कोई नोटिस है मेरे पास. नामज़द क्यों किया मुझे नहीं मालूम है. क्योंकि न तो मैं प्रोटेस्ट को लीड कर रही थी और न ही मैंने प्रोटेस्ट बुलाया था. मैं तो आम महिलाओं की तरह अपना विरोध दर्ज कराने के लिए बैठी थी और अभी भी बैठी हूं. मुझे तो यही लगता है कि हमें मुनव्वर राना की बेटी होने की ही सज़ा दी गई है क्योंकि सरकार समय-समय पर उन्हें टार्गेट करती रहती है जब से उन्होंने साहित्य अकादमी अवॉर्ड वापस किया है."
सुमैया कहती हैं कि एफ़आईआर क्यों दर्ज की गई है, ये समझ में नहीं आ रहा है. उनके मुताबिक, "कोई वीडियो या तस्वीर ऐसी नहीं मिलेगी जिसमें हमने क़ानून-व्यवस्था को नुक़सान पहुँचाने की कोशिश की हो. न तो किसी पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता हुई और न ही कोई ऐसा काम किया गया कि केस दर्ज हो. पुलिस वाले इतना सितम ढा रहे हैं, वहां से हटाने की कोशिश कर रहे हैं. फिर भी जब महिलाएं नहीं डरीं तो अब एफ़आईआर का डर दिखाया जा रहा है."
लखनऊ के डीसीपी वेस्ट अरुण श्रीवास्तव ने बीबीसी को बताया कि किसी को निशाना नहीं बनाया जा रहा है बल्कि जो लोग क़ानून तोड़ रहे थे उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है.
उनका कहना था, "जिन्हें नामज़द किया गया है वो लोग परिचित चेहरे थे. जो अज्ञात हैं, उनकी पहचान की जा रही है. किसी को टार्गेट नहीं किया गया है जो प्रदर्शनकारियों को भड़काने की कोशिश कर रहे थे, उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है."
राजधानी लखनऊ के घंटाघर में नागरिकता संशोधन क़ानून यानी सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ बड़ी संख्या में महिलाएं पिछले शुक्रवार से ही विरोध-प्रदर्शन कर रही हैं. यूपी पुलिस ने इस मामले में मुनव्वर राना की दो बेटियों समेत क़रीब 150 महिलाओं के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है. इन पर धारा 144 का उल्लंघन, सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप हैं. यह विरोध प्रदर्शन पिछले शुक्रवार को शुरू हुआ था और अभी भी जारी है.
मुनव्वर राना की बड़ी बेटी सुमैया भी इस प्रदर्शन में शुरू से ही शामिल हैं जबकि उनकी बहन फ़ौज़िया राना रविवार को पटना से आने के बाद इसमें शामिल हुईं. फ़ौज़िया पटना में ही रहती हैं और बच्चों के स्कूल में छुट्टियां होने के कारण लखनऊ आई हुई हैं. एफ़आईआर में फ़ौज़िया का भी नाम है लेकिन फ़ौज़िया इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार करती हैं.
वहीं, शायर मुनव्वर राना पुलिस की इस कार्रवाई पर कई सवाल खड़े करते हैं. बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "पहले तो धारा 144 प्रदर्शन शुरू होने के बाद लगाई गई और दूसरी बात ये कि अगर धारा 144 लागू है तो गृह मंत्री अमित शाह को रैली करने की इजाज़त कैसे मिल गई? जो काम हुक़ूमत का है वह हुक़ूमत कर रही है जो काम प्रोटेस्ट करने वालों का है वो कर रहे हैं."
मुनव्वर राना बेहद तल्ख़ अंदाज़ में कहते हैं कि सीएए क़ानून सीधे तौर पर समुदाय विशेष को लक्ष्य करके लाया गया है. उनके मुताबिक़, "जो भी महिलाएँ प्रदर्शन कर रही हैं, ऐसा नहीं है कि उनमें किसी की नागरिकता छिनने जा रही है. लेकिन सवाल इस बात का है कि इस क़ानून के ज़रिए निशाना किसे बनाया जा रहा है और संदेश क्या दिया जा रहा है."
पेशे से पत्रकार और कवयित्री सुमैया राना कहती हैं कि प्रदर्शन में शामिल ज़्यादातर घरेलू महिलाएं हैं जो ज़्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हैं. अगर इस क़ानून में ख़ामियां न होतीं या इनके पीछे कोई एजेंडा न होता तो इतने पढ़े लिखे लोग क्यों विरोध कर रहे होते.
वो कहती हैं, "एएमयू, जेएनयू, इलाहाबाद, आईआईटी जैसे संस्थानों के लोग अगर विरोध कर रहे हैं और उनमें भी उबाल है तो कोई तो वजह होगी. हम अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे, बावजूद इसके कि इस सरकार से हमें कोई उम्मीद नहीं है. यहां बैठी महिलाओं को गृहमंत्री से भले ही उम्मीद न हो लेकिन प्रधानमंत्री जी से तो उम्मीद कर ही सकते हैं जो हमेशा बेटी बचाओ और महिलाओं के हक़ में बातें करते हैं."
नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ लखनऊ के अलावा उत्तर प्रदेश के कई अन्य जगहों पर भी महिलाएं कई दिनों से धरने पर बैठी हैं. इलाहाबाद के रोशनबाग़ में ये धरना पिछले 10 दिनों से चल रहा है. इलाहाबाद में भी दो सौ से ज़्यादा महिलाओं के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है.
मुनव्वर राना की बड़ी बेटी सुमैया राना पहले दिन से ही प्रदर्शन में शामिल हैं और उस रात भी वहीं थीं, जब पुलिस वालों ने प्रदर्शनकारियों में बांटे जा रहे कंबल और खाने-पीने की चीज़ें ज़ब्त कर ली थीं. बीबीसी से बातचीत में सुमैया कहती हैं कि उन्हें और उनकी बहन को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वो मुनव्वर राना की बेटी हैं.
सुमैया कहती हैं, "हमें तो एफ़आईआर की कोई सूचना नहीं मिली है और न ही कोई नोटिस है मेरे पास. नामज़द क्यों किया मुझे नहीं मालूम है. क्योंकि न तो मैं प्रोटेस्ट को लीड कर रही थी और न ही मैंने प्रोटेस्ट बुलाया था. मैं तो आम महिलाओं की तरह अपना विरोध दर्ज कराने के लिए बैठी थी और अभी भी बैठी हूं. मुझे तो यही लगता है कि हमें मुनव्वर राना की बेटी होने की ही सज़ा दी गई है क्योंकि सरकार समय-समय पर उन्हें टार्गेट करती रहती है जब से उन्होंने साहित्य अकादमी अवॉर्ड वापस किया है."
सुमैया कहती हैं कि एफ़आईआर क्यों दर्ज की गई है, ये समझ में नहीं आ रहा है. उनके मुताबिक, "कोई वीडियो या तस्वीर ऐसी नहीं मिलेगी जिसमें हमने क़ानून-व्यवस्था को नुक़सान पहुँचाने की कोशिश की हो. न तो किसी पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता हुई और न ही कोई ऐसा काम किया गया कि केस दर्ज हो. पुलिस वाले इतना सितम ढा रहे हैं, वहां से हटाने की कोशिश कर रहे हैं. फिर भी जब महिलाएं नहीं डरीं तो अब एफ़आईआर का डर दिखाया जा रहा है."
लखनऊ के डीसीपी वेस्ट अरुण श्रीवास्तव ने बीबीसी को बताया कि किसी को निशाना नहीं बनाया जा रहा है बल्कि जो लोग क़ानून तोड़ रहे थे उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है.
उनका कहना था, "जिन्हें नामज़द किया गया है वो लोग परिचित चेहरे थे. जो अज्ञात हैं, उनकी पहचान की जा रही है. किसी को टार्गेट नहीं किया गया है जो प्रदर्शनकारियों को भड़काने की कोशिश कर रहे थे, उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है."
राजधानी लखनऊ के घंटाघर में नागरिकता संशोधन क़ानून यानी सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ बड़ी संख्या में महिलाएं पिछले शुक्रवार से ही विरोध-प्रदर्शन कर रही हैं. यूपी पुलिस ने इस मामले में मुनव्वर राना की दो बेटियों समेत क़रीब 150 महिलाओं के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है. इन पर धारा 144 का उल्लंघन, सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप हैं. यह विरोध प्रदर्शन पिछले शुक्रवार को शुरू हुआ था और अभी भी जारी है.
मुनव्वर राना की बड़ी बेटी सुमैया भी इस प्रदर्शन में शुरू से ही शामिल हैं जबकि उनकी बहन फ़ौज़िया राना रविवार को पटना से आने के बाद इसमें शामिल हुईं. फ़ौज़िया पटना में ही रहती हैं और बच्चों के स्कूल में छुट्टियां होने के कारण लखनऊ आई हुई हैं. एफ़आईआर में फ़ौज़िया का भी नाम है लेकिन फ़ौज़िया इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार करती हैं.
वहीं, शायर मुनव्वर राना पुलिस की इस कार्रवाई पर कई सवाल खड़े करते हैं. बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "पहले तो धारा 144 प्रदर्शन शुरू होने के बाद लगाई गई और दूसरी बात ये कि अगर धारा 144 लागू है तो गृह मंत्री अमित शाह को रैली करने की इजाज़त कैसे मिल गई? जो काम हुक़ूमत का है वह हुक़ूमत कर रही है जो काम प्रोटेस्ट करने वालों का है वो कर रहे हैं."
मुनव्वर राना बेहद तल्ख़ अंदाज़ में कहते हैं कि सीएए क़ानून सीधे तौर पर समुदाय विशेष को लक्ष्य करके लाया गया है. उनके मुताबिक़, "जो भी महिलाएँ प्रदर्शन कर रही हैं, ऐसा नहीं है कि उनमें किसी की नागरिकता छिनने जा रही है. लेकिन सवाल इस बात का है कि इस क़ानून के ज़रिए निशाना किसे बनाया जा रहा है और संदेश क्या दिया जा रहा है."
पेशे से पत्रकार और कवयित्री सुमैया राना कहती हैं कि प्रदर्शन में शामिल ज़्यादातर घरेलू महिलाएं हैं जो ज़्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हैं. अगर इस क़ानून में ख़ामियां न होतीं या इनके पीछे कोई एजेंडा न होता तो इतने पढ़े लिखे लोग क्यों विरोध कर रहे होते.
वो कहती हैं, "एएमयू, जेएनयू, इलाहाबाद, आईआईटी जैसे संस्थानों के लोग अगर विरोध कर रहे हैं और उनमें भी उबाल है तो कोई तो वजह होगी. हम अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे, बावजूद इसके कि इस सरकार से हमें कोई उम्मीद नहीं है. यहां बैठी महिलाओं को गृहमंत्री से भले ही उम्मीद न हो लेकिन प्रधानमंत्री जी से तो उम्मीद कर ही सकते हैं जो हमेशा बेटी बचाओ और महिलाओं के हक़ में बातें करते हैं."
नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ लखनऊ के अलावा उत्तर प्रदेश के कई अन्य जगहों पर भी महिलाएं कई दिनों से धरने पर बैठी हैं. इलाहाबाद के रोशनबाग़ में ये धरना पिछले 10 दिनों से चल रहा है. इलाहाबाद में भी दो सौ से ज़्यादा महिलाओं के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है.
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